Dashara Kab Hai | क्यों और कैसे मनाया जाता है दशहरा? तिथि, समय और शुभ मुहूर्त

Dashara Kab Hai? | क्यों और कैसे मनाया जाता है दशहरा? तिथि, समय और शुभ मुहूर्त: (Why and how Dussehra is celebrated Date time and auspicious time)दशहरा या विजयदशमी या आयुध-पूजा हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। आश्विन शुक्ल दशमी को विजयदशमी का त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्योहार भारतीय संस्कृति के वीरता का पूजक, शौर्य का उपासक है। व्यक्ति और समाज के रक्त में वीरता प्रकट हो इसलिए दशहरे का उत्सव रखा गया है।

2021 Me Dussehra Kab Hai

ram ji
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भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था। इसे असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है। इसीलिए इस दशमी को विजयादशमी के नाम से जाना जाता है। दशहरा वर्ष की तीन अत्यन्त शुभ तिथियों में से एक है, अन्य दो हैं चैत्र शुक्ल की एवं कार्तिक शुक्ल की प्रतिपदा। इसी दिन लोग नया कार्य प्रारम्भ करते हैं, शस्त्र-पूजा की जाती है।

प्राचीन काल में राजा लोग इस दिन विजय की प्रार्थना कर रण-यात्रा के लिए प्रस्थान करते थे। दशहरा का पर्व दस प्रकार के पापों- काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी जैसे अवगुणों को छोड़ने की प्रेरणा हमें देता है।

दशहरा या दसेरा शब्द ‘दश'(दस) एवं ‘अहन्‌‌’ से बना है। दशहरा उत्सव की उत्पत्ति के विषय में कई कल्पनाएं की गई हैं। कुछ लोगों का मत है कि यह कृषि का उत्सव है। दशहरे का सांस्कृतिक पहलू भी है। भारत कृषि प्रधान देश है।

When is Krishna Janmashtami 2021 Festival Date time and Muhurat

Dussehra 2021 Kab Hai

जब किसान अपने खेत में सुनहरी फसल उगाकर अनाज रूपी संपत्ति घर लाता है तो उसके उल्लास और उमंग का ठिकाना हमें नहीं रहता। इस प्रसन्नता के अवसर पर वह भगवान की कृपा को मानता है और उसे प्रकट करने के लिए वह उसका पूजन करता है। तो कुछ लोगों के मत के अनुसार यह रणयात्रा का द्योतक है, क्योंकि दशहरा के समय वर्षा समाप्त हो जाते हैं, नदियों की बाढ़ थम जाती है, धान आदि सहेज कर में रखे जाने वाले हो जाते हैं।

इस उत्सव का सम्बन्ध नवरात्रि से भी है क्योंकि नवरात्रि के उपरांत ही यह उत्सव होता है और इसमें महिषासुर के विरोध में देवी के साहसपूर्ण कार्यों का भी उल्लेख मिलता है।

दशहरा या विजया दशमी नवरात्रि के बाद दसवें दिन मनाया जाता है। इस दिन राम ने रावण का वध किया था। रावण भगवान राम की पत्नी देवी सीता का अपहरण कर लंका ले गया था। भगवान राम युद्ध की देवी मां दुर्गा के भक्त थे, उन्होंने युद्ध के दौरान पहले नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा की और दसवें दिन दुष्ट रावण का वध किया। इसलिए विजयादशमी एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है। राम की विजय के प्रतीक स्वरूप इस पर्व को ‘विजयादशमी’ कहा जाता है।

दशहरा पर्व को मनाने के लिए जगह-जगह बड़े मेलों का आयोजन किया जाता है। यहां लोग अपने परिवार, दोस्तों के साथ आते हैं और खुले आसमान के नीचे मेले का पूरा आनंद लेते हैं। मेले में तरह-तरह की वस्तुएं, चूड़ियों से लेकर खिलौने और कपड़े बेचे जाते हैं। इसके साथ ही मेले में व्यंजनों की भी भरमार रहती है।

Dashara Kab Hai?

ram kil ravan
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इस समय रामलीला का भी आयोजन होता है। रावण का विशाल पुतला बनाकर उसे जलाया जाता है। दशहरा अथवा विजयदशमी भगवान राम की विजय के रूप में मनाया जाए अथवा दुर्गा पूजा के रूप में, दोनों ही रूपों में यह शक्ति-पूजा, शस्त्र पूजन, हर्ष, उल्लास तथा विजय का पर्व है। रामलीला में जगह-जगह रावण वध का प्रदर्शन होता है।

इस दिन क्षत्रियों के यहां शस्त्र की पूजा होती है। इस दिन रावण, उसके भाई कुम्भकर्ण और पुत्र मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं। कलाकार राम, सीता और लक्ष्मण के रूप धारण करते हैं और आग के तीर से इन पुतलों को मारते हैं जो पटाखों से भरे होते हैं। पुतले में आग लगते ही वह धू-धू कर जलने लगता है और इनमें लगे पटाखे फटने लगते हैं और उससे उसका अंत हो जाता है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।

शक्ति की उपासना का पर्व शारदेय नवरात्रि प्रतिपदा से नवमी तक निश्चित नौ तिथि, नौ नक्षत्र, नौ शक्तियों की नवधा भक्ति के साथ सनातन काल से मनाया जा रहा है। इस मौके पर लोग नवरात्रि के नौ दिन जगदम्बा के अलग-अलग रूपों की उपासना करके शक्तिशाली बने रहने की कामना करते हैं। भारतीय संस्कृति सदा से ही वीरता व शौर्य की समर्थक रही है। दशहरे का उत्सव भी शक्ति के प्रतीक के रूप में मनाया जाने वाला उत्सव है।

Dussehra Kab Ka Hai

विजयदशमी 2021 तिथि: 15 अक्टूबर 2021

विजयदशमी 2021 का शुभ मुहूर्त: विजय मुहूर्त- 14 अक्टूबर 2021 दोपहर 6 बजकर 50 मिनट, से 15 अक्टूबर 2021, 6 बजकर 00 मिनट तक

 

Dashara Kab Ka Hai

दशमी तिथि आरंभ– दोपरह 6 बजकर 50 मिनट मिनट से (14 अक्तूबर)

दशमी तिथि समाप्त– दोपहर 6 बजकर 00 मिनट तक (15 अक्तूबर)

 

विजयदशमी का महत्व: विजयदशमी को बुराई पर अच्छाई का प्रतीक माना जाता है। इस दिन भगवान श्री राम ने रावण को मारकर धरती पर पुन: धर्म की स्थापना की थी। विजयदशमी के दिन रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतले को फूंका जाता है । इन तीनों के पूतलों को हर साल फूंक कर लोगों को बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है। विजयदशमी को दशहरा नाम से भी पुकारा जाता है। उत्तर भारत में विजयदशमी को विशेष महत्व दिया जाता है। विजयदशमी के दिन मेले का आयोजन भी होता है।

Dussehra Kab Hai

शारदीय नवरात्रि के समय नौ दिन मां दुर्गा का पूजन करने के बाद दसवें दिन रावण का पुतला बनाकर उसका दहन किया जाता है। इसका कारण और कथा त्रेतायुग से जुड़े हैं। त्रेतायुग में भगवान विष्णु ने श्रीराम के रूप में अवतार लिया था। श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। रामायण के अनुसार जब रावण ने माता सीता का हरण किया था । उसके बाद भगवान राम ने लंका में 14 दिनों तक रावण से युद्ध करके उसका वध किया था । जिसके उपलक्ष में विजयदशमी का त्योहार मनाया जाता है।

विजयदशमी पूजा विधि: विजयदशमी के दिन शस्त्रों की पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है।

2.विजयदशमी के दिन शस्त्रों पर जल का छिड़काव करके पहले उन्हें शुद्ध कर लें।

3.उसके बाद हल्दी ,कुमकुम का तिलक लगांए और उन पर फूल चढ़ांए।

4.शस्त्रों का शमी के पत्ते जरूर चढ़ांए।

5.दशहरे के दिन शमी के पेड़ को विशेष महत्व दिया जाता है । इसलिए शमी के पेड़ की पूजा अवश्य करें।

विजयदशमी की कथा: पौराणिक कथा के अनुसार भगवान राम को अपने पिता के दिए हुए एक वचन के कारण 14 वर्ष के वनवास पर जाना पड़ा था। जब राम वन के लिए जाने लगे तो उनके छोटे भाई लक्ष्मण और पत्नी सीता भी उनके साथ गए। वन में श्रीराम को देखकर लंका के राजा रावण की बहन सूर्पनखा श्रीराम पर मोहित हो गई और उसने श्रीराम के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा।

श्रीराम ने सूर्पनखा को आदरपूर्वक बताया कि वह उनसे विवाह नहीं कर सकते क्योंकि उन्होंने अपनी पत्नी सीता को वचन दिया है कि वह उनके अतिरिक्त किसी और से विवाह नहीं करेंगे। यह कहकर श्रीराम ने सूर्पनखा को लक्ष्मण के पास भेज दिया। लक्ष्मण के पास जाकर सूर्पनखा विवाह करने की हठ करने लगीं तो लक्ष्मण ने उन्हें मना कर दिया। इस पर सूर्पनखा नहीं मानी तो लक्ष्मण ने क्रोधित होकर उसके नाक-कान काट दिए।

रोती हुई सूर्पनखा अपने भाई रावण के पास पहुंची और उसे राम और लक्ष्मण के बारे में बताया। तब रावण ने छल से माता सीता का हरण कर लिया। फिर राम भक्त हनुमान ने माता सीता की खोज की। बहुत समझाने के बाद भी जब रावण माता सीता को ससम्मान श्रीराम के पास भेजने के लिए तैयार नहीं हुआ तो श्रीराम ने उसका वध कर दिया और माता सीता को लंका से वापस ले आए।

श्रीराम ने जिस दिन रावण का वध किया उस दिन शारदीय नवरात्र की दशमी तिथि थी। इसीलिए इस त्योहार को विजयदशमी भी कहते हैं। रावण के बुरे कर्म पर श्रीराम की अच्छाई की जीत हुई इसलिए इसे बुराई पर अच्छाई की जीत के त्योहार के रूप में भी मनाते हैं। विजयदशमी पर रावण का पुतला बनाकर उसका दहन किया जाता है। रावण के साथ ही उसके बेटे मेघनाथ और भाई कुंभकरण के पुतले का भी दहन किया जाता है।

 

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