Vishwakarma Puja Kab Hai? | विश्वकर्मा पूजा कथा शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Vishwakarma Puja Katha auspicious time and method of worship

Vishwakarma Puja Katha auspicious time and method of worship

Vishwakarma Puja Kab Hai? | विश्वकर्मा पूजा कथा शुभ मुहूर्त और पूजा विधि:- हर साल की तरह इस साल भी विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर 2019 को मनाई जाएगी. हिंदू धर्म में इस दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने का खास महत्व माना जाता है. इस दिन व्यवसाय, ऑफिस, कारखाना, अस्त्र-शस्त्र पूजा की जाती है. मान्यता है कि इस दिन विश्वकर्मा की पूजा करने से कारोबार में मुनाफा होता है और आपकी खूब तरक्की होती है.

Vishwakarma Puja Kab Hai

Vishwakarma Puja Katha auspicious time and method of worship
Vishwakarma Puja Katha auspicious time and method of worsh

 

Vishwakarma Puja Kab Hai 2021 Mein

पूरे संसार की रचना भगवान विश्वकर्मा के हाथों से की गई थी. कहा जाता है कि इन्ही के कंधो पर भगवान ब्रह्म ने सृष्टि के निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी थी. भगवान विश्वकर्मा को इंजीनियर और आर्किटेक्ट भी कहा जाता है. इस दिन फैक्ट्री, कारखानों और अन्य निर्माण स्थलों में भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है. कहा जाता है कि पौराणिक काल में देवताओं के अस्त्र-शस्त्र और महलों का निर्माण भगवान विश्वकर्मा द्वारा ही किया गया था. इसी वजह से भगवान विश्वकरमा को निरमाण और सृजन का देवता भी माना जाता है. सोने की लंका, पुष्पक विमान, इंद्र का व्रज, भगवान शिव का त्रिशुल, पांडवों के लिए इंद्रपस्थ नगप और भगवान कृष्ण की नगरी द्वारका रचना भी भगवान विश्वकर्मा ने की थी. इस समस्त संसार की रचना विश्वकर्मा ने ही की थी.

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Vishwakarma Puja Kab Ki Hai

विश्वकर्मा पूजा तारीख: 17 सितंबर 2021 मंगलवार ( Friday)

शुभ मुहूर्त: विश्वकर्मा पूजा संक्रांति क्षण – दोपहर 01:29AM बजे

कौन हैं  भगवान विश्‍वकर्मा? भगवान विश्‍वकर्मा  को निर्माण का देवता माना जाता है. मान्‍यता है कि उन्‍होंने देवताओं के लिए अनेकों भव्‍य  महलों, आलीशान भवनों, हथियारों और सिंघासनों का निर्माण किया. मान्‍यता है कि एक बार  असुरों से परेशान देवताओं की गुहार पर विश्‍वकर्मा ने महर्षि दधीची की हड्डियों देवताओं के राजा इंद्र के लिए वज्र बनाया. यह वज्र इतना प्रभावशाली था कि असुरों का  सर्वनाश हो गया. यही वजह है कि सभी देवताओं  में भगवान विश्‍वकर्मा का विशेष स्‍थान है. विश्‍वकर्मा ने एक से बढ़कर एक भवन बनाए.  मान्‍यता है कि उन्‍होंने रावण की लंका, कृष्‍ण नगरी द्वारिका, पांडवों के लिए इंद्रप्रस्‍थ नगरी और   हस्तिनापुर का निर्माण किया.  माना  जाता है कि उन्‍होंने उड़ीसा स्थित जगन्नाथ मंदिर के लिए भगवान जगन्नाथ सहित, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्ति का निर्माण अपने हाथों से किया था. इसके अलावा उन्‍होंने कई बेजोड़ हथियार बनाए जिनमें भगवान शिव का त्रिशूल, भगवान विष्‍णु का सुदर्शन   चक्र और यमराज  का कालदंड शामिल हैं. यही  नहीं उन्‍होंने दानवीर कर्ण के कुंडल और पुष्‍पक विमान भी बनाया. माना जाता है  कि रावण के अंत के बाद राम, लक्ष्‍मण सीता और अन्‍य साथी इसी पुष्‍पक विमान पर बैठकर अयोध्‍या लौटे थे.

विश्वकर्मा पूजा का महत्व: भगवान विश्वकर्मा के जन्मदिन को विश्नकर्मा पूजा, विश्नकर्मा दिवस या विश्वकर्मा जयंती के नाम से जाना जाता है. इस पर्व का हिंदू धर्म में काफी महत्व है. ऐसी मानयता है कि भगवान विश्वकर्मा ने ही सतयुग के स्वर्ग लोक, श्रेता युग की लंका, द्वापर की द्वारिका और कलयुग की हस्तिनापुर की रचना की थी. भगवान विश्वकर्मा को देवताओं के शिल्पकार, वास्तुशास्त्र के देवता, प्रथम इंजीनियर, देवताओं का इंजीनियर और मशीन का देवता कहा जाता है. इसलिए यह पूजा उन लोगों के लिए अधिक महत्वपूर्ण हैं जो कलाकार बनकर, शिल्पकार और व्यापारी हैं. ऐसी मान्‍यता है कि भगवान विश्‍वकर्मा की पूजा करने से व्‍यापार में वृद्धि होती है.

विश्वकर्मा पूजन विधि: विश्वकर्मा पूजा के दिन भगवान की मूर्ती को मंदिर में विराजित कर पूजा की जाती है. जिस व्यक्ति के प्रतिष्ठान में पूजा होनी है वह सुबह स्नान करने के बाद अपनी  पत्नी के साथ पूजन करें. हाथ में फूल, चावल लेकर भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करते हुए घर और प्रतिष्ठान में फूल व चावल को छिड़कने चाहिए. ऐसा करने के बाद जन कराने वाले व्यक्ति को पत्नी के साथ यज्ञ में आहुति देनी चाहिए .पूजा करते समय दीप, धूप, पुष्प, गंध, सुपारी आदि का प्रयोग करें. सबसे पहले स्‍नान अपनी गाड़ी, मोटर या दुकान की मशीनों को साफ कर लें.

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– उसके बाद स्‍नान करें.

– घर के मंदिर में बैठकर विष्‍णु जी का ध्‍यान करें और पुष्‍प चढाएं.

– एक कमंडल में पानी लेकर उसमें पुष्‍प डालें.

– अब भगवान विश्‍वकर्मा का ध्‍यान करें.

– अब जमीन पर आठ पंखुड़‍ियों वाला कमल बनाएं.

– अब उस स्‍थान पर सात प्रकार के अनाज रखें.

– अनाज पर तांबे या मिट्टी के बर्तन में रखे पानी का छिड़काव करें.

– अब चावल पात्र को समर्पित करते हुए वरुण देव का ध्‍यान करें.

– अब सात प्रकार की मिट्टी, सुपारी और दक्षिणा को कलश में डालकर उसे कपड़े से ढक दें.

– अब भगवान विश्‍वकर्मा को फूल चढ़ाकर आशीर्वाद लें मान्‍यता है कि विश्‍वकर्मा की पूजा करने से व्‍यापार में दिन-दूनी रात चौगुनी वृद्धि होती है. हिंदू धर्म में पूजन से अगले दिन प्रतिमा का  विसर्जन करने का विधान है.

कैसे मनाई जाती है विश्‍वकर्मा जयंती?: विश्‍वकर्मा दिवस घरों के अलावा दफ्तरों और कारखानों में विशेष रूप से मनाया जाता है. जो लोग इंजीनियरिंग, आर्किटेक्‍चर, चित्रकारी, वेल्डिंग और मशीनों के काम से जुड़े हुए वे खास तौर से इस दिन को बड़े उत्‍साह के साथ मनाते हैं. इस दिन मशीनों, दफ्तरों और कारखानों की सफाई की जाती है. साथ ही विश्‍वकर्मा की मूर्तियों को सजाया जाता है. घरों में लोग अपनी गाड़‍ियों, कंम्‍प्‍यूटर, लैपटॉप व अन्‍य मशीनों की पूजा करते हैं. मंदिर में विश्‍वकर्मा भगवान की मूर्ति या फोटो की विधिवत पूजा करने के बाद आरती की जाती है. अंत में  प्रसाद वितरण किया जाता है.

Vishwakarma Puja Katha auspicious time and method of worship
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पूजन के मंत्र : भगवान विश्वकर्मा की पूजा में ‘ॐ आधार शक्तपे नम: और ॐ कूमयि नम:’, ‘ॐ अनन्तम नम:’, ‘पृथिव्यै नम:’ मंत्र का जप करना चाहिए। जप के लिए रुद्राक्ष की माला होना चाहिए।

जप शुरू करने से पहले ग्यारह सौ, इक्कीस सौ, इक्यावन सौ या ग्यारह हजार जप का संकल्प लें। चूंकि इस दिन प्रतिष्ठान में छुट्टी रहती है तो आप किसी पुरोहित से भी जप संपन्न करा सकते हैं।

विश्‍वकर्मा की आरती: ॐ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।

सकल सृष्टि के कर्ता रक्षक श्रुति धर्मा ॥

आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया।

शिल्प शस्त्र का जग में, ज्ञान विकास किया ॥

ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नही पाई।

ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्धि आई॥

रोग ग्रस्त राजा ने, जब आश्रय लीना।

संकट मोचन बनकर, दूर दुख कीना॥

जब रथकार दम्पती, तुमरी टेर करी।

सुनकर दीन प्रार्थना, विपत्ति हरी सगरी॥

एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।

द्विभुज, चतुर्भुज, दशभुज, सकल रूप साजे॥

ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे।

मन दुविधा मिट जावे, अटल शांति पावे॥

श्री विश्वकर्मा जी की आरती, जो कोई नर गावे।

कहत गजानन स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे॥

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