असली धन – गाँव से जुड़ी प्रेरक कहानी
🌾 कहानी – इज्जत के असली धन
बिहार के भोजपुर ज़िले के एक छोटे से गाँव सरयां में रघुनाथ बाबा नाम के 80 साल के बुज़ुर्ग रहते थे। सफेद धोती-कुर्ता, सिर पर गमछा और हाथ में एक पुराना लाठी उनका सहारा था।
गाँव में लोग उन्हें ज़्यादातर नज़रअंदाज़ करते थे। कोई कहता – “बुढ़वा अबका काम का बा?”
लेकिन रघुनाथ बाबा के अंदर अब भी स्वाभिमान और इज्जत की लौ जल रही थी।

एक दिन गाँव में मेले का आयोजन हुआ। सब लोग रंग-बिरंगे कपड़ों में, ढोल-नगाड़े की धुन पर झूम रहे थे। दुकानों पर मिठाई और खिलौनों की भरमार थी। भीड़ में रघुनाथ बाबा धीरे-धीरे चल रहे थे।
अचानक उनका पैर फिसल गया और वे गिर पड़े। चारों तरफ लोग हँसने लगे –
“देखऽ-देखऽ बुढ़वा गिर गइल!”
लेकिन तभी गाँव का एक नौजवान रामप्रकाश दौड़ता हुआ आया। उसने बाबा को उठाया, अपने कंधे पर सहारा दिया और बोला –
“बाबा, हमार इज्जत तोहरा में बा। गाँव के इतिहास तोहार बिना अधूरा बा।”
उस दिन पूरा गाँव समझ गया कि इज्जत का मतलब कपड़ों या उम्र से नहीं, बल्कि जीवन भर के कर्म और संस्कारों से होता है।